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Year Ender Middle East Leader Death 2024: समझौते, हथियार, जंग और लाशें. मध्य पूर्व के लिए साल 2024 लंबे वक्त तक याद रखने वाला साल रहा. पूरा मध्य पूर्व इन मुद्दों के आगे पीछे घुमता रहा और इस इलाके में अमन और चैन नदारद थी. ये साल मध्य पूर्व के ‘प्रतिरोध की धुरी’ कहे जाने वाले गुट के लिए बेकार साबित हुआ. 

एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस यानी ‘प्रतिरोध की धुरी’ में गाजा का हमास, लेबनान का हिज्बुल्लाह, ईरान, यमन के हूती, ईराक और सीरिया के विद्रोही गुट शामिल हैं. इस गुट का मानना है कि ये फिलिस्तीन या मध्य पूर्व में आने वाले किसी खतरे से निपटने के लिए एक साथ आएंगे. ये गुट इजरायल को अपना दुश्मन मानता है. यही वजह रही कि इजरायल ने चुन चुन कर इन गुटों के नेताओं को मौत के घाट उतार दिया और कुछ नेता खुद ही मौत के मुंह में चले गए.

मध्य पूर्व में पनपे जंग ने क्षेत्रीय सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय जरूरतें पैदा हुई हैं. साल 2024 में मध्य पूर्व के कुछ ऐसी शख्सियतों की मौत हुई जिसका दबदबा पूरे इलाके में था, इसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय तौर से आंतकवादी घोषित था तो कुछ देश की शीर्ष पदों पर थे.

हमास के वो नेता जो जंग के हत्थे चढ़ गए 

याह्या सिनवार- 

इजरायल और हमास के बीच जंग की शुरूआत से ही याह्या सिनवार नेतन्याहू और अमेरिका की निशाने पर था. इजरायल पर हमास के हमले के लगभग साल भर बाद इजरायली सेना ने याह्या सिनवार को मौत की नींद सुला दी. याह्या सिनवार हमास का चीफ था और उसे ‘खान यूनिस का कसाई’ भी कहते थे. 

इस्माइल हानियेह- 

इस्माइल हानियेह हमास के पॉलिटिकल विंग का चीफ था. उसकी मौत तेहरान में ईरानी सेना के छत्रछाया में हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इस्माइल हानियेह के तकिए के नीचे इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने विस्फोटक लगा दिए थे. 

सालेह अल अरौरी

सालेह अल अरौरी हमास के पॉलिटिकल विंग का डिप्टी चीफ था. इसके अलावा वह कासिम ब्रिगेड का चीफ भी था. साल 2024 की शुरूआत में ही सालेह को लेबनान के बेरुत के एक कस्बे में इजरायली सेना ने ड्रोन हमले में मार गिराया था. साल 2015 में अमेरिका ने सालेह के ऊपर 50 लाख डॉलर का ईनाम रखा था. 

मोहम्मद जईफ

इसी साल जुलाई में इजरायली सेना और खुफिया एजेंसी ने हमास के मिलिट्री कमांडर मोहम्मद जईफ को मार गिराया था. जईफ को दक्षिण गाजा में हमले में मारा गया था, उसके साथ करीब 300 लोगों की मौत हो गई थी. 

हिज्बुल्लाह के नेताओं को इजरायल ने चुन चुन कर किया खत्म

हिज्बुल्लाह ईरान का प्रॉक्सी संगठन कहा जाता है. ये संगठन लेबनान में ऑपरेट करती है. इजरायल इस संगठन को अपने लिए खतरा मानता है. साल 2024 में इजरायल ने अपने हमलों में संगठन के कई नेताओं को निशाना बनाया. 

हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह

27 सितंबर को बेरूत के पास हवाई हमले में इजरायली सेना ने हसन नसरल्लाह को मार गिराया. 64 वर्षीय नसरल्लाह के नेतृत्व में लेबनान का हिजबुल्लाह राजनीतिक और सैन्य दोनों ही रूप से एक शक्तिशाली ताकत के रूप में उभरा. हसन नसरल्लाह ने करीब तीन दशक से ज्यादा वक्त से संगठन का नेतृत्व किया था. नसरल्लाह की मौत के बाद हिज्बुल्लाह के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे.

हाशेम सफीदीन

22 अक्टूबर को इजरायल रक्षा बलों ने दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी बेरूत में हिजबुल्लाह के दूसरे-इन-कमांड हाशेम सफीदीन को मार गिराया है. हालांकि बाद में हमास ने भी उसके मौत की पुष्टि की. सफीदीन हिजबुल्लाह के लिए एक अहम शख्स था. उसे हसन नसरल्लाह के बाद संगठन का चीफ बनाया जाना था. सफीदीन ने संगठन को ईरान के साथ संबंधों को बढ़ाने में भी मदद की.

ईरान के नेता की मौत और सीरिया में तख्तापलट

साल 2024 के मई महीने में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी बेल-212 हेलिकॉप्टर के क्रैश होने के कारण मारे गए थे. इसके साथ ही ईरान के विदेश हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन की भी उसी हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई थी. इब्राहिम रईसी एक धार्मिक स्कॉलर थे, जनता में उनकी पकड़ काफी तेज़ थी. उनकी मौत के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अलग थलग पड़ गए. ईरान भी मध्य पूर्व में शिया देश होने की वजह अलग थलग पड़ गया.

दूसरी ओर सीरिया में साल 2024 में बशर अल असद की सरकार के तख्तापलट के बाद ईरान और तुर्किए के संबंध भी खटाई में पड़ गए हैं. इस तरह पूरा मध्य पूर्व यानी पश्चिमी एशिया जंग और बुरे दौर से गुजर रहा है. साल 2024 में मध्य पूर्व ने अभूतपूर्व दौर देखा है.

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