waqf Amendment Bill does not get passed in parliament Jairam Ramesh claim if BJP rival party naveen patnaik BJD dont support
Waqf Amendment Bill: संसद के दोनों सदनों ने वक्फ संशोधन विधेयक पास कर दिया है. अब राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा. वक्फ बिल के खिलाफ देश के कई राज्यों में अलग-अलग मुस्लिम संगठनों के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि बीजू जनता दल (बीजेडी) ने ऐन मौके पर बीजेपी का साथ दे दिया. वहीं बीजेडी के उपाध्यक्ष देबी मिश्रा ने विधेयक के पक्ष में राज्यसभा में मतदान पर विस्तृत बयान जारी किया. उन्होंने इस मुद्दे पर पार्टी के दृष्टिकोण और निर्णय की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दी.
वक्फ बिल को लेकर जयराम रमेश का खुलासा
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर लोकसभा में मतदान 288-232 रहा, जबकि राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े. सदन में बीजेपी के लिए जीत का अंतर बहुत कम था. दरअसल, राज्यसभा में यह सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक झटका था और Treasury Benches को यह देखकर हैरानी थी कि विपक्ष ने इतनी मजबूत संख्या जुटा ली. यह संख्या 95 से भी अधिक होती अगर बीजेडी ने अंतिम क्षणों में बीजेपी के दबाव के आगे घुटने न टेक दिए होते.”
विचार-विमर्श के बाद समर्थन का फैसला किया- BJD
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेडी के उपाध्यक्ष देबी मिश्रा ने कहा, “यह एक गहन विचार-विमर्श का मामला था. हमारे सांसदों को स्थिति का विश्लेषण करने की स्वतंत्रता दी गई थी. एक महीने पहले पार्टी ने इस विधेयक के विरोध का निर्णय लिया था. हालांकि, तब से कई घटनाएं हुई हैं, जिनसे नई चिंताएं और आशंकाएं उत्पन्न हुई हैं, खासकर उन धाराओं को लेकर जो अल्पसंख्यक संस्थाओं की शक्तियों को कमजोर कर सकती हैं.”
उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से अल्पसंख्यकों के वास्तविक अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रही है. एक सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था में, सभी समुदायों के सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय भी शामिल हैं.
देबी मिश्रा ने कहा कि वक्फ बोर्ड में कुछ व्यक्तियों द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के बारे में चिंता हो सकती है, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थाओं को कमजोर करने की बड़ी आशंका को संबोधित किया जाना चाहिए. इसी कारण हमारे सांसदों से इस बिल का गहन अध्ययन करने, स्वतंत्र रूप से विचार करने और अपने विचार व्यक्त करने का अनुरोध किया गया था.
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