Supreme Court Transfer Bihar Bridges collapsed case to Patna High Court ann
बिहार में एक के बाद एक पुलों के गिरने की घटनाओं की जांच को लेकर बिहार सरकार और NHAI के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. कोर्ट ने मामले को विस्तृत सुनवाई के लिए पटना हाई कोर्ट के पास भेज दिया है. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने पटना हाई कोर्ट से मामले पर तेज सुनवाई के लिए भी कहा है.
क्या है मामला?
वकील ब्रजेश सिंह ने पिछले साल यह याचिका दाखिल की थी. उन्होंने बताया था 18 जुलाई से 29 जुलाई, 2024 के बीच बिहार में एक के बाद एक 6 पुल गिर गए. यह पुल अररिया, सिवान, मधुबनी, किशनगंज जैसे अलग-अलग जिलों में थे. यह बिहार में नदी या सड़क पर बने पुलों की सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है. याचिकाकर्ता ने बिहार के सभी पुलों का ऑडिट कर उनकी हालत का पता लगाने की मांग की थी. साथ ही, निर्माणाधीन पुलों की निगरानी की व्यवस्था बनाने की भी मांग की थी.
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
29 जुलाई 2024 को थोड़ी देर सुनवाई के बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया. कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव, पथ निर्माण सचिव, केंद्रीय सड़क मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से जवाब मांगा था.
अब पटना हाई कोर्ट को भेजा केस
बुधवार, 2 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को पटना हाई कोर्ट के पास ट्रांसफर कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह 3 सप्ताह के भीतर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज हाई कोर्ट के पास भेज दे. मामले की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट 14 मई से सुनवाई शुरू कर दे.
जांच पर जताया असंतोष
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और NHAI की तरफ से दाखिल जवाब को असंतोषजनक कहा. बेंच के सदस्य जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि 3 पुल निर्माण के दौरान ही गिर गए और कुछ अधिकारियों को सस्पेंड कर काम चला लिया गया. कुछ दिनों में वह फिर नौकरी पर लौट आएंगे. बिहार सरकार के वकील ने कहा कि विभागीय जांच जारी है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से विभागीय जांच की भी निगरानी करने को कहा. 2 जजों की बेंच ने हाई कोर्ट से बिहार में पुलों की सुरक्षा जांच को लेकर उठाए जा रहे कदमों की मॉनिटरिंग करने के लिए भी कहा है.