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Parliamentary Panel Called For Voting Rights To NRI With Indian Citizenship through Proxy Voting Or E Ballot


Parliamentary Panel: संसद की एक समिति ने प्रॉक्सी वोटिंग या इलेक्ट्रॉनिक बैलेट सिस्टम के जरिए भारतीय नागरिकता वाले एनआरआई को वोटिंग का अधिकार देनी की मांग की है. पैनल ने कहा कि यह मामला फिलहाल कानून मंत्रालय के पास लंबित है.

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता में विदेश मामलों पर संसदीय पैनल गुरुवार (27 मार्च, 2025) को प्रवासी भारतीयों पर अपनी रिपोर्ट पेश करने वाला है. रिपोर्ट में एनआरआई की एकीकृत परिभाषा की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, क्योंकि इस शब्द का इस्तेमाल कई कानूनों में अलग-अलग तरीके से किया जाता है.

एनआरआई वोटिंग के लिए क्या कहता है मौजूदा नियम?

पैनल ने पाया कि एनआरआई के चुनावी अधिकार को दरकिनार किया जा रहा है, क्योंकि मौजूदा नियमों के अनुसार मतदाता सूची में शामिल एनआरआई को वोटिंग के लिए फिजिकल रूप से मौजूद होना जरूरी है. अपनी रिपोर्ट में पैनल ने एनआरआई की बढ़ती संख्या के बारे में चिंता जताई है, जिनके पास अब भारतीय नागरिकता नहीं है या जिनके पास दोहरी राष्ट्रीयता है.

जबकि एनआरआई वोटिंग अधिकारों का मुद्दा अभी भी कानून मंत्रालय की ओर से समीक्षाधीन है, पैनल ने विदेश मंत्रालय (एमईए) से कानून मंत्रालय और भारत के चुनाव आयोग दोनों के साथ इस मामले को आगे बढ़ाने का आग्रह किया. संसदीय पैनल ने प्रॉक्सी वोटिंग या इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस) का इस्तेमाल करने सहित संभावित समाधान प्रस्तावित किए.

एनआरआई को सीमित मतदान अधिकार मिले

2010 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 20ए में संशोधन करके एनआरआई को सीमित मतदान अधिकार दिए गए. 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले लगभग 1.2 लाख एनआरआई मतदाता सूची में नामांकित थे, लेकिन 2019 के चुनावों में केवल 2,958 विदेशी मतदाता ही मतदान करने के लिए भारत आए.

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