Muslim World League Secretary General Abdulkarim Al-Issa Said I Salute Indian Democracy And Constitution Of India
Abdulkarim Al-Issa India Visit: मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) के महासचिव डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुल करीम अल-इस्सा भारत के दौरे पर हैं. उन्होंने बुधवार (12 जुलाई) को दिल्ली में विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यक्रम में शिरकत की. इस दौरान उन्होंने कहा कि आप सब की सियासी एकता से मैं काफी प्रभावित हूं. जब हमारे बीच में बातचीत की कमी होती है तो गलतफहमियां पैदा होती हैं. इसलिए जरूरी है कि हम पूरी दुनिया में डायलॉग का माहौल बनाएं.
उन्होंने कहा कि बातचीत केवल जबानी जमाखर्च नहीं होनी चाहिए. किसी भी डायलॉग का फायदा तभी है जब वो सच्चा हो. अल-इस्सा ने कहा कि हिंदुस्तान की विस्डम से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. पूरी दुनिया में अगर किसी से सीखा जा सकता है तो वो है भारत. दुनिया में कई मामलों में एक दूसरे से विरोध भी होता है और अलग-अलग राय भी होते हैं, फिर भी हम सब मिलकर रहते हैं. हमारा ईमान है, हमारी जड़ें एक ही हैं, हमारी बुनियाद भी एक ही है.
“भारत के संविधान को सलाम करता हूं”
भारत की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जब मैंने भारत में अलग-अलग धर्मगुरुओं से बात की और हिंदू धर्मगुरुओं से बात की तो यहां के लोगों ने आपसी भाईचारे और एक साथ मिलकर रहने पर जोर दिया. ऐसी मिसाल मैंने दुनिया में कहीं नहीं देखी. हमें धार्मिक टकराव के खिलाफ खड़ा हो जाना चाहिए ताकि कट्टरवाद दोबारा से खड़ा ना हो सके. मैं तहे दिल से भारतीय लोकतंत्र और भारत के संविधान को सलाम करता हूं. उस सोच को सलाम करता हूं जिसने पूरी दुनिया को शांति आई सौहार्द का संदेश दिया है.
अल-इस्सा ने और क्या कहा?
अल-इस्सा ने कहा कि हमें दो मोर्चों पर काम करने की जरूरत है- शिक्षा और युवाओं को दुष्प्रचार से बचाना. बच्चों को शुरुआत में ही ये बातें समझानी होंगी. अलग-अलग धर्मों में विवाद हो रहा है, उसे बचपन से ही बच्चों में रोकना होगा. विडंबना यह है कि नफरत फैलाने वाली किताबें सकारात्मक, बहुलवादी संदेशों को बढ़ावा देने वाली किताबों की तुलना में अधिक व्यापक हो गई हैं.
आतंकवाद पर क्या बोले?
महासचिव ने कहा कि गलत विचारधाराओं की वजह से अतिवाद और फिर आतंकवाद फैला. टकराव को रोकने के लिए हमें अगली पीढ़ी को बचपन से ही सुरक्षित और मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है. सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए, कई नेताओं ने नफरत भरी कहानियों का इस्तेमाल किया है. धार्मिक नेता आज चुप हैं और आपसी समझ को बढ़ावा देने के लिए काम नहीं कर रहे हैं.
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