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Farmers Delhi Chalo Protest Sarwan Singh Pandher said government only wants to postpone Farmers movement


Punjab News: पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हम सरकार से बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखेंगे. अगर सरकार चाहे तो कभी भी घोषणा कर सकती है. हालांकि, वे केवल हमारे विरोध को विलंबित करना चाहते हैं. सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि एमएसपी अधिनियम के बारे में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री की तरफ से कहा गया कि वे एक समिति बनाएंगे. सीएसीपी ने 23 फसलों के लिए एमएसपी की सिफारिश की है. हमने उनसे कहा कि इस बारे में कानूनी गारंटी दी जानी चाहिए.

सरवन सिंह पंढेर ने आगे कहा कि हमने कहा कि सरकार को हमें एक तर्क देना चाहिए (ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता). एक समिति बनाने के बजाय जिन 23 फसलों का आप अनाउंसमेंट कर रहे हैं, उसपर कंफर्म कर दें कि मंडी में एमएसपी से नीचे बिकेगी ही नहीं. वो कमेटी बनाकर सिर्फ हमारे मुद्दे को विलंबित करना चाहते हैं.

‘सरकार सिर्फ आंदोलन को टालना चाहती है’
पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव ने कहा कि 2 साल पहले हमें एमएसपी खरीद की गारंटी की बात कही गई थी, लेकिन अब 2 साल बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ. इसके बाद अब 40-45 दिन पहले आंदोलन की घोषणा की गई थी, तब भी उनकी तरफ से कुछ नहीं किया गया. अब वे सिर्फ आंदोलन को टालना चाहते हैं.

सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक में हम एक समाधान खोजने की कोशिश कर रहे थे ताकि हमें सरकार के खिलाफ खड़ा न होना पड़े. हम उम्मीद कर रहे थे कि हमें कुछ दिया जाएगा. 5 घंटे की लंबी वार्ता में बैठक के दौरान हमने हरियाणा की स्थिति सामने रखी. हमारी तरफ से कहा गया कि पंजाब और हरियाणा के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है. ऐसा लगता है कि ये दोनों राज्य अब भारत का हिस्सा नहीं हैं, इन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा माना जा रहा है.

‘कांग्रेस को हम मनाते हैं दोषी’

किसान नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमारा समर्थन नहीं करती है, हम कांग्रेस को भी उतना ही जिम्मेदार मानते हैं जितना बीजेपी को. ये कानून कांग्रेस ही लेकर आई है, हम कोई लेफ्ट नहीं है. सीपीआई-सीपीएम ने जो बंगाल में राज किया, उन्होंने बीसों गलतियां की, वहां बंगाल में कौन सा इंकलाब आ गया. हम किसी के पक्ष वाले नहीं हैं. हम किसान मजदूर की आवाज उठाने वाले हैं. 

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