Delhi NCR pollution Supreme Court hearing on Firecrackers ban Judge angry on person for saying Firecrackers sulphar makes air fresh
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (3 अप्रैल, 2025) को सुनवाई की. कोर्ट को बताया गया कि पटाखों पर बैन लगने से प्रदूषण 30 पर्सेंट तक कम हुआ है. इस पर आवेदन दाखिल करने वाले शख्स दावा करने लगे कि पटाखों के सल्फर से हवा शुद्ध होती है. जज ने इस बात पर उनको फटकार लगाई और कहा कि आप ज्यादा बड़े एक्सपर्ट हैं क्या.
दिल्ली एनसीआर में पटाखे जलाने पर लगी पाबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है. कोर्ट ने पटाखों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री में ढील देने से भी इनकार कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लंबे समय तक चिंताजनक स्थिति में था.
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइंया की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी.पटाखा बनाने वाली कंपिनयों ने कोर्ट को बताया कि गुणवत्ता में सुधार के लिए काम किया जा रहा है. ग्रीन पटाखों को लेकर कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार ग्रीन पटाखे दूसरे पटाखों की तुलना में सिर्फ 30 पर्सेंट ही कम प्रदूषण करते हैं. कोर्ट इन तर्कों से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने पूरे साल के लिए पटाखों पर लगे बैन को बरकरार रखा. वहीं, एक याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विदेशी एजेंसियों के इशारे पर पटाखों पर रोक लगाई जा रही है. पटाखों में मौजूद सल्फर हवा को शुद्ध बनाने में मदद करता है.
जजों ने याचिकाकर्ता के इस तर्क पर हैरानी जताते हुए कहा, ‘क्या आप NEERI से भी बड़े एक्सपर्ट हैं? 2 बजे आइए, हम आपको भी कुछ देर सुनेंगे.’ इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 2 बजे तक के लिए टाल दी थी. आवेदन दाखिल करने वाले ने प्रदूषण मामले के मुख्य याचिकाकर्ता एम सी मेहता और दूसरे संगठनों के लोगों पर भारत विरोधी विदेशी संस्थाओं से चंदा खाने का भी आरोप लगाया. जजों ने आवेदन खारिज करते हुए कहा कि यह आपकी पहली ऐसी हरकत है, इसलिए हम जुर्माना नहीं लगा रहे हैं.
कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण किस तरह लोगों की प्रभावित कर रहा है, उसका अंदाजा लगाया जा सकता है. हर इंसान के लिए ये मुमकिन नहीं है कि वो घर या ऑफिस में एयर प्यूरिफायर लगा सके. बेंच ने कहा कि समाज का एक वर्ग ऐसा भी है, जो सड़कों पर काम करता है और प्रदूषण सबसे ज्यादा और खतरनाक तरीके से इन लोगों को प्रभावित करता है. कोर्ट ने कहा कि संविधान का आर्टिकल 21 भी स्वास्थ्य के अधिकार की बात करता है इसलिए हर इंसान को प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का हक है.
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