पाकिस्तान में ‘फादर ऑफ तालिबान’ के बेटे का भी वही अंजाम, मस्जिद में किए गए फिदायीन हमले में हक्कानी की मौत
Blast in Khyber Pakhtunkhwa Pakistan: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा की मस्जिद के बाहर हुए धमाके में पाकिस्तान में ‘फादर ऑफ तालिबान’ मौलाना समी-उल हक के बेटे मौलाना हमिद उल हक हक्कानी की मौत हो गई है. जियो न्यूज ने इस बात की तस्दीक की है. शुक्रवार की नमाज के दौरान पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत के नौशहरा शहर के पास अखोरा खट्टक इलाके में दारुल उलूम हक्कानी मदरसे में हुए एक संदिग्ध आत्मघाती विस्फोट में कई लोगों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए. आत्मघाती हमलावर शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिद के मुख्य हॉल में मौजूद था और नमाज खत्म होते ही उसने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. बड़ी बात ये है कि हक्कानी के पिता की मौत भी शुक्रवार को ही हुई थी.
ब्लास्ट की बड़ी बातें
- पाकिस्तान के खैबर खैबर पख्तूनख्वा के नौशेरा में मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद ब्लास्ट.
- दारूल उलूम हक्कानी मदरसे में किया गया ब्लास्ट.
- फिदायीन हमले में मौलाना हमिद उल हक हक्कानी की मौत.
- पाकिस्तान में हक्कानिया मदरसे के प्रमुख थे हमिद उल हक हक्कानी.
- हक्कानी भारत विरोधी बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते थे.
- हक्कानी के पिता की भी उनके घर में ही हत्या कर दी गई थी.
- पाकिस्तानी तालिबान के पिता कहे जाने वाले मौलाना समी-उल हक का बेटा था हक्कानी.
अखोरा खट्टक के स्थानीय लोगों ने आईएएनएस से पुष्टि की कि अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक दर्जन से अधिक अन्य घायल हो गए हैं. हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है क्योंकि जब विस्फोट हुआ तब बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के अंदर थे. जिओ न्यूज के अनुसार, मौलाना हामिद उल हक हक्कानी की सुरक्षा में 10 से 15 लोग तैनात रहते थे. ये लोग भी इस बम विस्फोट में घायल हुए हैं.
खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) जुल्फिकार हमीद ने पुष्टि की, “अब तक कम से कम पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 से अधिक गंभीर रूप से घायल हैं. ” अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है ,क्योंकि अस्पताल में लाए गए अधिकांश घायलों की हालत गंभीर है.
तालिबान का लॉन्चिंग पैड था मदरसा
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आतंकवादी समूह तालिबान के जनक के रूप में जाने जाने वाले पाकिस्तानी मौलवी मौलाना समी-उल-हक की भी चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. वह रावलपिंडी के गैरीसन शहर में मारा गया था. 82 वर्षीय हक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति था और उसके विचारों का सीमा के दोनों ओर के तालिबानों के बीच काफी महत्व था. अफगान सीमा के मुख्य मोटरमार्ग से दूर एक धूल भरे पाकिस्तानी शहर में स्थित, उसका दारुल उलूम हक्कानिया विश्वविद्यालय 1990 के दशक में तालिबान के लिए लॉन्चिंग पैड था और अभी भी अक्सर इसे इस्लामी आतंकवादियों के लिए इनक्यूबेटर के रूप में बताया जाता है.
आखिर हमलावर जुमे की नमाज के दौरान अंदर कैसे घुसा, पाकिस्तान पुलिस इसकी जांच कर रही है. रोड के ठीक करीब इस मदरसे की सुरक्षा का जिम्मा हक्कानी मदरसा ही संभालता है. मस्जिद के अंदर मदरसे में काफी लोग तालीम लेते हैं. पाकिस्तान पुलिस को शक है कि हमलावर इनमें से ही कोई हो सकता है.
किसने करवाया हमला
अखोरा खट्टक के अन्य सूत्रों का कहना है कि मस्जिद में मौजूद 24 से अधिक लोग विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए हैं. प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आत्मघाती हमलावर का लक्ष्य धार्मिक राजनीतिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम समीउल हक (जेयूआई-एस) के वरिष्ठ नेता मौलाना हमिद उल हक हक्कानी था. अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. हालांकि, यह उम्मीद की जा रही है कि तालिबान के प्रतिद्वंद्वी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) या उसके सहयोगी समूह दाएश इस हमले के पीछे हो सकते हैं.
दारुल उलूम हक्कानी क्या है
दारुल उलूम हक्कानी मदरसा पाकिस्तान के सबसे कट्टरपंथी मदरसों में से एक है. इस मदरसे में हजारों छात्र पढ़ते हैं. इसे अफगान तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का समर्थन करने के लिए जाना जाता है. दारुल उलूम हक्कानिया को कई टीटीपी और अफगान तालिबान कमांडरों की प्रारंभिक शिक्षा स्थल के रूप में भी जाना जाता है. जेयूआई-एस का संस्थापक मौलाना समी-उल हक तालिबान का समर्थन करने वाले एक बहुत ही मुखर व्यक्ति था. हक की नवंबर 2018 में रावलपिंडी में उसके आवास पर अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी.