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Political Year Ender: 31 दिसंबर 2024 की आखिरी तारीख है और इस साल कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिले. आम चुनाव से लेकर 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव के अलावा कई नेताओं को जेल होने जैसी घटनाओं के साथ इस साल का अंत हो रहा है.
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार बीजेपी ने केंद्र में अपनी सत्ता बनाई तो वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को संकट झेलना पड़ा. इसी तरह का घटनाक्रम झारखंड सीएम हेमंत सोरेन को भी देखने को मिला. तो आइए जानते हैं 2024 के बड़ी घटनाओं और राजनीतिक चेहरों के बारे में.
इस साल की शुरुआत राम मंदिर के उद्घाटन जैसे बड़े इवेंट के साथ हुई. इसके बाद राजनीतिक माहौल भी बदला हुआ दिखा. बिहार में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी खाई और एनडीए गठबंधन का हिस्सा बने. इसके बाद झारखंड में जमीन घोटाले में फंसे हेमंत सोरेन को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा और बाद में उनको गिरफ्तार भी किया गया. हालांकि साल के अंत तक उन्होंने वापसी की, चुनाव जीता और एक बार फिर मुख्यमंत्री बने.
इसके बाद ऐसा ही संकट आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी फेस करना पड़ा, जब शराब घोटाले में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. ये पहल बार था जब कोई मुख्यमंत्री रहते हुए गिरफ्तार हुआ. चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के साथ-साथ 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा की और देश के सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में लग गए.
आम चुनाव के नतीजे आने के बाद नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने. वो पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे ऐसे पीएम हैं जिन्हें तीसरा कार्यकाल मिला है. हालांकि इस चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत तो नहीं मिला लेकिन पीएम मोदी के तेवरों में कमी नहीं दिखी.
वहीं, राहुल गांधी के लिए ये साल भी कुछ खास कमाल नहीं दिखा सका. हालांकि लोकसभा चुनाव में उन्हें रायबरेली और वायनाड दोनों ही सीटों से जीत मिली और अमेठी सीट भी उन्होंने ही जितवाई. यहां तक कि इस चुनाव में उन्होंने संविधान की दुहाई देकर बीजेपी के वोट में डेंट लगाया लेकिन कांग्रेस की सत्ता की उम्मीद पर वो खरे नहीं उतर सके. हां कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी जरूर हुई.
चंद्रबाबू नायडू की अगर बात की जाए तो आंध्र प्रदेश में हासिए पर खड़े टीडीपी के मुखिया के लिए ये साल गजब की तरक्की लेकर आया. लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने एनडीए से गठबंधन किया और आंध्र प्रदेश के चुनाव में तो उन्होंने अपने विरोधियों सियासी आंधी में उड़ा दिया. एक तरफ राज्य में चुनाव जीतकर खुद मुख्यमंत्री बने तो केंद्र में मोदी की सरकार बनवाई.
इसी तरह नीतीश कुमार के साथ भी इस साल गजब के संयोग देखने को मिले. चुनाव से पहेल इंडिया गठबंधन छोड़ वो एनडीए में शामिल हुए और फिर एक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ एक और शपथ ली कि वो एनडीए छोड़कर कभी नहीं जाएंगे. केंद्र की एनडीए सरकार में उनका भी अहम योगदान है और वो किंगमेकर बनकर सामने आए.
इन सब के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगर बात की जाए तो वो पूरे साल ही खबरों में छाए रहे. फिर चाहे राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियों को लेकर हो या फिर लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी की कम सीटें आने का ठीकरा उनके ऊपर फोड़े जाने की चर्चा. इसके बाद बंटेगे तो कटेंगे का नारा हो या फिर यूपी उपचुनाव में बीजेपी को मिली बड़ी सफलता. पूरे साल ही वो चर्चा का विषय बने रहे.
साल के आखिरी में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर जीत मिली. इसके नायक रहे देवेंद्र फडणवीस, जो राज्य के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. उनकी चर्चा इसलिए नहीं है कि उन्होंने जीत दिलाई बल्कि उनकी चर्चा इसलिए भी हो रही है कि उन्होंने बीजेपी को महाजीत दिलाई. क्योंकि चुनाव के शुरुआत में आकलन लगाया जा रहा था कि महाविकास अघाड़ी के सामने महायुति कितना दम दिखा पाएगी लेकिन ये अंदाजा किसी को नहीं था कि फडणवीस नीति के सामने सूपड़ा ही साफ हो जाएगा.
इस साल एक चेहरे ने और सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा और वो हैं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला. दरअसल 2024 में सभी की निगाहें जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव पर लगी हुईं थीं. क्योंकि आर्टिकल 370 हटने के बाद राज्य में पहली बार चुनाव हो रहे थे और चर्चा हो रही थी कैसे और किन हालातों में चुनाव होंगे लेकिन शांतिपूर्ण माहौल में चुनाव निपटा और नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई और सरकार भी बनाई.
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