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संसद में वक्फ बिल पास होने के बाद और बढ़ी सिसायत, लोकसभा में हंगामा, कांग्रेस-जमीयत जाएंगे सुप्रीम कोर्ट




नई दिल्ली:

वक्फ संशोधन बिल 2025 भले ही लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो गया है लेकिन इसे लेकर सियासी खींचतान अभी भी जारी है. अब यह मामला संसद से निकलकर सड़क और कोर्ट तक पहुंच चुका है. विपक्षी दल जहां इस बिल के खिलाफ अब विरोध प्रदर्शन करने की बात कर रहे हैं वहीं कांग्रेस ने इस बिल की संवैधानिकता वैधता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. खबर आ रही है कांग्रेस इस बिल के पास होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दाखिल करने की योजना बना रही है. कांग्रेस के लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने वक्फ संसोधन बिल को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच एनडीटीवी से कहा है कि हम वक्फ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. हमने इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है. 

आपको बता दें कि वक्फ बिल को लेकर जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपना विरोध जताया है. जमीयत के यूपी के कानूनी सलाहकार मौलाना काब राशिदी ने इसे लेकर कहा बै कि जमीयत उलेमा एक हिन्द ने वक्फ बिल के विरोध में दिल्ली, कर्नाटक समेत देश के कई राज्यों में रैलियां की है. हम आगे भी इसका विरोध जारी रखेंगे. जमीयत उलेमा ए हिंद की वर्किंग कमेटी की बैठक में बीते यह तय किया  गया कि इस कानून के पारित होने के बाद वो इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे. 

लोकसभा में हुआ हंगामा

वक्फ संसोधन बिल के दोनों ही सदनों में पारित होने के बाद शुक्रवार को जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसद इस बिल के पास होने को लेकर हंगामा करने लगे. लोकसभा स्पीकर ने हंगााम कर रहे सांसदों को रोकने की हर संभव कोशिश की लेकिन जब हंगामा नहीं रुका तो उन्होंने सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया.

पीएम मोदी ने वक्फ बिल पास होने पर जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक के पारित होने पर शुक्रवार को प्रसन्नता जताई और कहा कि यह कदम सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास के सामूहिक प्रयास की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण है. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए मददगार होगा जो लंबे समय से हाशिये पर हैं, जिन्हें आवाज उठाने और अवसर दोनों से वंचित रखा गया है. मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि दशकों से वक्फ प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का पर्याय बन गई है, जिससे विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं, गरीब मुसलमानों और पसमांदा मुसलमानों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है.







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