वक्फ कानून में संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कांग्रेस सांसद ने दाखिल की याचिका
<div dir="auto" style="text-align: justify;">संसद से पारित वक्फ संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति के सहमति मिलने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हो गई है. याचिका कांग्रेस के लोकसभा सांसद और सदन में पार्टी के व्हिप मोहम्मद जावेद ने दाखिल की है. याचिका में दावा किया गया है कि यह कानून मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाला है.</div>
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<div dir="auto" style="text-align: justify;">मोहम्मद जावेद ने याचिका में बताया है कि वह पेशे से डॉक्टर हैं. वह बिहार के किशनगंज से सांसद और वक्फ संशोधन बिल से जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य भी हैं. वकील अनस तनवीर के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह विधेयक कई मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन करने वाला है. याचिका में संशोधित कानून को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (समानता), 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) 26 (धार्मिक मामलों की व्यवस्था) और 29 (अल्पसंख्यक अधिकार) जैसे मौलिक अधिकारों के विरुद्ध बताया है. याचिकाकर्ता ने कानून में बदलाव को अनुच्छेद 300A यानी संपत्ति के अधिकार के भी खिलाफ बताया है.</div>
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<div dir="auto" style="text-align: justify;">मोहम्मद जावेद ने कहा है कि भारत में दूसरे धर्म से जुड़े ट्रस्टों को स्वायत्तता मिली हुई है. वह अपने मामलों पर खुद फैसला लेते हैं. लेकिन संशोधन विधेयक पास करके वक्फ में सरकारी दखल बढ़ाया जा रहा है. वक्फ संपत्ति की प्रकृति पर फैसला लेने की शक्ति वक्फ बोर्ड की जगह कलक्टर को दे दी गई है.</div>
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<div dir="auto" style="text-align: justify;">याचिका में वक्फ करने वाले के लिए कम से कम 5 साल से मुस्लिम होने की शर्त को भी इस याचिका में गलत बताया गया है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि इस्लामिक कानून इस बात में फर्क नहीं करते कि वक्फ करने वाला व्यक्ति कितने समय से मुस्लिम है. ऐसे में नए कानून के जरिए रखी जा रही शर्त सीधे-सीधे धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करती है. इसके अलावा हाल ही में मुस्लिम बने किसी व्यक्ति को अपनी संपत्ति पर फैसला लेने से रोकना उसके साथ धार्मिक आधार पर भेदभाव होगा. इस तरह से यह अनुच्छेद 15 का उल्लंघन है. किसी व्यक्ति को अपनी संपत्ति के मैनेजमेंट से रोकना अनुच्छेद 300A के भी खिलाफ है.</div>
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<div dir="auto" style="text-align: justify;">याचिका में वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल में गैर मुस्लिम सदस्यों को रखे जाने का भी विरोध किया गया है. याचिका में कहा गया है कि दूसरे धर्मों की धार्मिक संस्थाओं के लिए इस तरह का प्रावधान नहीं है. उनकी संस्थाओं को उसी धर्म के लोग चलाते हैं. अगर दूसरे धर्म के लिए भी इसी तरह के नियम नहीं बनाए जाते, तो यह सीधे-सीधे मुसलमानों के साथ भेदभाव माना जाएगा. याचिकाकर्ता ने वक्फ ट्रिब्यूनल में इस्लामिक विद्वानों की संख्या घटाए जाने का भी विरोध किया है.</div>
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