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बैंकों को नुकसान पहुंचाने वाले 5 दोषियों को 5 साल की सजा, 27 लाख का जुर्माना



<p style="text-align: justify;">मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में पांच दोषियों को 5 साल की कठोर कैद (रिगोरस इम्प्रिज़नमेंट) और कुल 27 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. दोषियों में धनलक्ष्मी बैंक, मदुरै के पूर्व शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर), ऋण वसूली अधिकरण (DRT) के पूर्व अधिकारी और दो निजी व्यक्ति शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कौन हैं दोषी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सजा पाने वालों में शामिल हैं:&nbsp;एस. कसीमयन &ndash; पूर्व रिकवरी ऑफिसर, DRT, मदुरै,&nbsp;सेल्वराज &ndash; पूर्व UDC, DRT, मदुरै,&nbsp;एन. वेंकेश्वरन &ndash; पूर्व ब्रांच मैनेजर, धनलक्ष्मी बैंक, मदुरै,&nbsp;आर. राजेश कन्नन &ndash; निजी व्यक्ति,&nbsp;आर. अनिता &ndash; दोषी UDC की पत्नी</p>
<p style="text-align: justify;">गौरतलब है कि इन सभी को ट्रायल कोर्ट ने पहले बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने CBI की अपील पर उन्हें दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या था पूरा मामला?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">CBI ने 30 मार्च 2009 को इस मामले में केस दर्ज किया था. जांच में सामने आया कि पूर्व रिकवरी अधिकारी एस. कसीमयन ने जानबूझकर 2008 में बैंक की नीलामी की गई संपत्तियों का न्यूनतम मूल्य (Upset Price) बाजार मूल्य से कम तय कर दिया. इसके लिए उन्होंने धनलक्ष्मी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर एन. वेंकेश्वरन और अन्य आरोपियों के साथ साजिश रची. इस घोटाले की वजह से बैंक और संपत्ति मालिक को बड़ा नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को गलत तरीके से आर्थिक लाभ मिला.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>CBI की जांच और अदालत का फैसला</strong></p>
<p style="text-align: justify;">CBI ने इस मामले की जांच पूरी करने के बाद 6 जून 2011 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. लेकिन 7 दिसंबर 2016 को ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया.&nbsp;इसके बाद CBI ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने CBI की अपील को स्वीकार करते हुए सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सजा का विवरण</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व रिकवरी अधिकारी एस. कसीमयन और बैंक मैनेजर एन. वेंकेश्वरन को 5 साल की कठोर कैद और 6-6 लाख रुपये जुर्माना लगाया. वहीं, पूर्व UDC सेल्वराज, आर. राजेश कन्नन और आर. अनिता को 5 साल की सजा और 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सुप्रीम कोर्ट में अपील और सजा पर रोक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक दोषी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2025 को आदेश दिया कि हाईकोर्ट दोषियों को सजा सुना सकता है, लेकिन सजा पर तीन सप्ताह के लिए रोक रहेगी.&nbsp;इसी आदेश के तहत मद्रास हाईकोर्ट ने फिलहाल सजा पर रोक लगाते हुए आगे की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस फैसले से साफ हो गया है कि बैंक धोखाधड़ी में शामिल अधिकारियों और निजी लोगों को कानून से बचने का मौका नहीं मिलेगा. CBI की अपील के बाद हाईकोर्ट का यह फैसला अन्य बैंक घोटालों के मामलों के लिए भी मिसाल बनेगा.</p>



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