दादा साहेब फाल्के से लेकर पद्मश्री तक मनोज कुमार को एक्टिंग के लिए मिले ये बड़े अवॉर्ड

मुंबई:
जब जीरो दिया मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आई…बॉलीवुड के इस मशहूर गाने को भला कोई कैसे भूल सकता है. इस गाने को एक्टर मनोज कुमार के ऊपर फिल्माया गया है. जैसे ही आज एक्टर मनोज कुमार के हमें अलविदा कहने की खबर आई वो पुरानी धुंधली यादें फिर से उजली हो गई, जिनके सहारे बचपन के शानदार दिन गुजरे. पूरब और पश्चिम फिल्म का वो गाना भला कोई कैसे भूल सकता है, जिसमें भारत की खूबसूरती को महज एक गाने के जरिए बता दिया गया. बॉलीवुड में जो रूतबा एक्टर मनोज कुमार का था, वैसा किसी दूसरे का हरगिज नहीं हो सकता. मनोज कुमार को भारत कुमार के नाम से भी जाना जाता है. मनोज कुमार एक बेहतरीन एक्टर के साथ डायरेक्टर भी थे. उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी हैं. जिसमें पूरब और पश्चिम, संतोष, क्लर्क और उपकार के नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं. अपने शानदार काम के लिए मनोज कुमार को भारत के सबसे बड़े फिल्म अवार्ड दादा साहेब फाल्के से भी नवाजा जा चुका है. इसके अलावा उन्होंने और भी कई बड़े अवार्ड हासिल किए-
एक्टर मनोज कुमार को किन-किन प्रमुख अवॉर्ड से नवाजा गया
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (Dadasaheb Phalke Award)
साल 2016: भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए
मनोज कुमार को 2016 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया, जो भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा अवार्ड है. यह पुरस्कार उन्हें उनके लंबे करियर और सिनेमा में उनके योगदान के लिए दिया गया. यह सम्मान 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया गया था.
फिल्मफेयर अवार्ड्स
मनोज कुमार को फिल्मफेयर अवार्ड्स में कई बार सम्मानित किया गया।.ये पुरस्कार भारतीय फिल्म उद्योग के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक हैं.
प्रमुख फिल्मफेयर अवार्ड्स:
1968: सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – “उपकार”
फिल्म “उपकार” (1967) के लिए मनोज कुमार को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला. यह फिल्म देशभक्ति और सामाजिक संदेश के लिए देशभर में जबरदस्त हिट हुई थी.
1972: सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – “बेईमान”
फिल्म “बेईमान” (1972) में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इस फिल्म में उन्होंने एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी.
1975: सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – “रोटी कपड़ा और मकान”
फिल्म “रोटी कपड़ा और मकान” (1974) के लिए उन्हें फिर से सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला. यह फिल्म सामाजिक मुद्दों पर आधारित थी और उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक थी।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards)
1968: सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (निर्माता के रूप में) – “उपकार”
“उपकार” को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में “सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म” का सम्मान मिला. मनोज कुमार इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक दोनों थे. यह पुरस्कार भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिया जाता है.
पद्मश्री (Padma Shri)
1992: कला के क्षेत्र में योगदान के लिए
भारत सरकार ने मनोज कुमार को उनके सिनेमा के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी नवाजा. यह भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. यह पुरस्कार उन्हें देशभक्ति और सामाजिक संदेशों वाली फिल्मों के लिए दिया गया.
मनोज कुमार की बेहतरी फिल्में
- क्रांति
- शहीद
- उपकार
- रोटी कपड़ा और मकान
- हरियाली
- शहीद
- शोर
- बेईमान
बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब रोमांस और ट्रेजेडी की कहानियां सिनेमाघरों में खूब छाई हुई थीं, एक मनोज कुमार ने आकर देशभक्ति की ऐसी लौ जलाई कि उनका नाम ही “भारत कुमार” पड़ गया. यह कहानी है मनोज कुमार की—एक ऐसे अभिनेता, निर्देशक और कहानीकार की, जिसने अपनी फिल्मों से न सिर्फ लोगों के दिल जीते, बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने की भावना भी जगाई. उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था, लेकिन उनकी जिंदगी और करियर का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं.