क्या था शाह बानो और शायरा बानो का केस, संसद में जिसका जिक्र कर बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा?
<p style="text-align: justify;">बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश करते हुए बीजेपी ने शाह बानो और शायरा बानो के मामलों का जिक्र किया. यह दोनों मामले मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़े ऐतिहासिक न्यायिक फैसलों के रूप में प्रसिद्ध हुए, बीजेपी ने इन मामलों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया. दोनों मामलों ने भारतीय राजनीति को गहरे तरीके से प्रभावित किया और आज भी यह मुद्दे चर्चा में रहते हैं. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शाह बानो मामला </strong></p>
<p style="text-align: justify;">1985 में शाह बानो नाम की महिला ने अपने पति से तलाक के बाद मेंटेनेंस (आर्थिक सहायता) की मांग की थी. उनका पति कहता था कि वह सिर्फ ‘इद्दत’ (तीन महीने) की अवधि तक ही मेंटेनेंस देने के लिए जिम्मेदार है, लेकिन शाह बानो का कहना था कि वह खुद को आर्थिक रूप से सपोर्ट नहीं कर सकती. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई महिला खुद को संभालने में सक्षम नहीं है, तो उसके पति को उसे मेंटेनेंस देना होगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि इस फैसले से मुस्लिम व्यक्तिगत कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके बाद कांग्रेस सरकार 1986 में एक कानून लाई, मुस्लिम महिलाओं (तलाक के बाद अधिकारों की रक्षा) अधिनियम, जिसने इस फैसले को पलट दिया. इस कानून में कहा गया कि तलाक के बाद पति को सिर्फ इद्दत की अवधि तक ही मेंटेनेंस देना होगा. बीजेपी ने इसे वोट बैंक की राजनीति के रूप में देखा और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए यह कदम उठाया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शायरा बानो का केस </strong><br />शायरा बानो का मामला 2015 में सामने आया, जब उनके पति ने उन्हें ‘ट्रिपल तलाक’ (तलाक-ए-बिद्दत) देकर तलाक दे दिया. इस प्रथा में पति बिना पत्नी की सहमति के एक बार में तीन बार ‘तलाक’ शब्द बोलकर तलाक दे सकता है. शायरा ने इसे असंवैधानिक बताया और अदालत में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया, यह कहते हुए कि यह महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसे तुरंत समाप्त कर दिया जाना चाहिए. इसके बाद मोदी सरकार ने 2019 में एक कानून पारित किया, जिसमें ट्रिपल तलाक को अपराध मानते हुए इसे गैर-जमानती अपराध बना दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बीजेपी का कांग्रेस पर हमला</strong><br />बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने संसद में इन दोनों मामलों का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर हमला किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नकारते हुए मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की और वोट बैंक की राजनीति की. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने शायरा बानो मामले में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया और इस मुद्दे को लटकाए रखा.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 1985 में शाह बानो के मामले में कानून लाकर एक बड़े वर्ग को खुश करने की कोशिश की, लेकिन इस फैसले के बाद कांग्रेस कभी भी अपनी पूर्ण बहुमत वाली सरकार नहीं बना पाई. उन्होंने यह तंज किया कि कांग्रेस का यह कदम एक राजनीतिक गलती थी, जिसके कारण पार्टी को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>वक्फ बिल और कांग्रेस का विरोध</strong></p>
<p style="text-align: justify;">बीजेपी ने वक्फ संशोधन बिल पर भी कांग्रेस पर हमला किया, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन से संबंधित है. विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इस बिल को जल्दबाजी में लाकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक राजनीतिक एजेंडा चला रही है. वहीं, बीजेपी का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए लाया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;">शाह बानो और शायरा बानो के मामले ने न केवल न्यायिक फैसलों को प्रभावित किया, बल्कि भारतीय राजनीति में भी गहरे प्रभाव डाले. बीजेपी ने इन मामलों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इन फैसलों को अपने राजनीतिक फायदे के लिए अपनी नीति के अनुसार बदलने की कोशिश की. इन मामलों का जिक्र संसद में इस बात को स्पष्ट करता है कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे आज भी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.</p>
Source link