कौन हैं शेर सिंह राणा, जिन्होंने सपा सांसद रामजीलाल सुमन को ‘काबुल’ पहुंचा देने की धमकी दी है
नई दिल्ली:
समाजवादी पार्टी की सांसद फूलन देवी की दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या का आरोप पंकज सिंह उर्फ शेर सिंह राणा पर लगा था.इस मामले में उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी. फिलहाल वो जमानत पर हैं.शेर सिंह राणा एक बार फिर समाजवादी पार्टी के एक सांसद को धमकी देने को लेकर चर्चा में हैं.इस बार उन्होंने सपा के राज्य सभा सदस्य रामजीलाल सुमन को धमकी दी है. राजपूत राजा राणा सांगा पर संसद में की गई टिप्पणियों को लेकर सुमन इन दिन राजपूतों के निशाने पर हैं. करणी सेना नाम के एक संगठन ने 26 मार्च को आगरा में सुमन के घर पर हमला किया था. इससे उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी.सपा इसे दलितों पर हमले के रूप में पेश कर रही है.अब इस मामले में राणा ने कहा है कि अगर सापा सांसद ने माफी नहीं मांगी तो वे उन्हें अफगानिस्तान के काबुल में स्थित बाबर की कब्र वाले कमरे में उन्हें बंद कर आएंगे.उनका कहना है कि वो वहां समुन चारदिवारी के भीतर सोचेंगे कि उन्होंने क्या और क्यों बोला. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुमन पर कार्रवाई की मांग की है.
शेर सिंह राणा और फूल देवी
शेर सिंह राणा गुरुवार को आगरा में थे. वहां उन्होंने 26 मार्च को सपा सांसद सुमन के आवास पर हमले के दौरान लाठीचार्ज में घायल करणी सेना के कार्यकर्ताओं से मुलाकात की.इस अवसर पर राणा ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा कि अखिलेश सिर्फ यादवों का भी भला करते हैं.उनका आरोप था कि अखिलेश केवल यादवों को नौकरियां और पार्टी में पद देते हैं. लेकिन पिछड़े वर्ग की दूसरी जातियों को फायदा नहीं देते हैं.उन्होंने कहा कि राणा सांगा केवल क्षत्रियों के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के हैं.उन्होंने सुमन के बयान को राष्ट्रवादी सोच का विरोधी बताया.आगरा में 12 अप्रैल को राणा सांगा की जयंती मनाई जाएगी. आयोजकों ने इसे ‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ नाम दिया है.

सपा सांसद फूलन देवी की हत्या में दोषी ठहराए गए शेर सिंह राणा इन दिनों जमानत पर जेल से बाहर हैं.
शेर सिंह राणा पर 25 जुलाई 2001 को हथियार छोड़कर सांसद बनीं फूलन देवी की उनके घर के बाहर ही गोली मार कर हत्या करने का आरोप था.राणा का दावा है कि उन्होंने 1981 में हुए बेहमई हत्याकांड का बदला लिया था, जिसमें फूलन देवी ने 22 ठाकुरों की हत्या कर दी थी. फूलन देवी की हत्या के दो दिन बाद राणा ने उत्तराखंड के देहरादून में आत्मसमर्पण कर दिया था.देहरादून से उन्हें दिल्ली लाया गया था. उन्हें देश में अतिसुरक्षित मानी जाने वाले तिहाड़ जेल में रखा गया था. वहां से वो 17 फरवरी 2004 को फरार हो गए. वो किसी तरह अफगानिस्तान पहुंचे थे. वहां से वो राजपूत राजा रहे पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लेकर भारत लौटे. उन्हें 17 मई 2006 को कोलकाता में गिरफ्तार किया गया था.
कहां बनवाया है पृथ्वीराज चौहान का मंदिर
फूलन देवी की हत्या के आरोप में शेर सिंह राणा को 2014 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई. उन्होंने सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की थी. अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी. अदालत ने शर्त लगाई कि उन्हें हर साल जून और दिसंबर के दूसरे शनिवार को उत्तराखंड के रूड़की के पुलिस अधीक्षक के सामने अपनी मौजूदगी दिखानी होगी. उन्हें फूलन देवी के परिजनों और गवाहों से भी दूर रहने का निर्देश है.
जमानत से रिहा होने के बाद राणा ने गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान के मंदिर की स्थापना की. उनके मुताबिक इसी मंदिर में पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां रखी हुई हैं.इसके अलावा शेर सिंह राणा ने राष्ट्रीय जनलोक पार्टी के नाम से एक पार्टी की स्थापना भी की है.उन्होंने 2012 में उत्तर प्रदेश के जेवर से सुरेश राणा के खिलाफ ताल ठोकी थी.लेकिन राणा बनाम राणा के इस मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
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